भारत की बहुउद्देशीय परियोजना : ऐसी परियोजनाएं जिनसे बहुत सारे उद्देश्यों की पूर्ति होती है बहुउद्देशीय परियोजनाएं कहलाती है। बहुउद्देशीय परियोजना द्वारा सिंचाई, जैव विविधता संरक्षण, बाढ़ नियंत्रण, नहर परिवहन, सूखा निवारण, पेयजल आपूर्ति, जलविद्युत उत्पादन, मत्स्य पालन और पर्यटन उद्योग आदि उद्देश्य की पूर्ति की जाती है। इसलिए भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पं० जवाहर लाल नेहरू ने इन परियोजनाओं को आधुनिक भारत का मंदिर की संज्ञा दी है। बांध इसी परियोजना के अंतर्गत आते है। वर्त्तमान समय में विश्व में लगभग 40000 बड़े बांध है जिसमे से लगभग 4000 बड़े बांध भारत में है।

आज हम आपको आपने इस लेख के माध्यम से बहुउद्देशीय परियोजनाओं के बारे में बताने जा रहे है। भारत की प्रमुख बहुउद्देशीय परियोजनाओं के बारे में जानने के लिए इस आर्टिकल को पढ़े और अपने ज्ञान में और वृद्धि करें।

भारत की प्रमुख बहुउद्देशीय परियोजना (Major Multipurpose Project in India)

नदियों की घाटियो पर बडे-बडे बांध बनाकर ऊर्जा, सिंचाई, पर्यटन स्थलों की सुविधाएं प्राप्त की जातीं हैं। इसीलिए इन्हें बहूद्देशीय (बहु+उद्देश्यीय) परियोजना कहते हैं। नदी घाटी परीयोजना का प्राथमिक उद्देश्य होता है, किसी नदी घाटी के अंतर्गत जल और थल का मानव हित के पूर्ण उपयोग करना है। भारत की प्रमुख बहुउद्देशीय परियोजनाएँ निम्नलिखित हैं – (i) दामोदर घाटी परियोजना(ii) भाखड़ा नांगल परियोजना, (iii) रिहन्द बाँध परियोजना(iv)हीराकुण्ड बाँध(v)कोसी परियोजना

आज कल यूपीएससी, रेलवे, एसएससी, बैंकिंग और अन्य प्रतियोगी परीक्षा में भारत की बहुउद्देशीय परियोजनाएं/ भारत की नदी घाटी परियोजनाएं से सम्बंधित प्रश्न पूछे जाते है। भारत की बहुउद्देशीय परियोजनाएं PDF के लिए हमारे इस लेख को पढ़े, जो आपकी आने वाली प्रतियोगी परीक्षा में मददगार साबित होगा।

बहुउद्देशीय परियोजना से सम्बंधित नदियां एवं राज्य

भारत की बहुउद्देशीय परियोजनाएं किस नदी पर है और इस बहुउद्देशीय परियोजना का विकास किस राज्य में हुआ है। आइये एक नज़र डालते है :

बहुउद्देशीय परियोजनानदीराज्य
दामोदर नदी घाटी परियोजनादामोदर नदीपश्चिम बंगाल और झारखण्ड
कोसी नदी परियोजनाकोसी नदीनेपाल और बिहार
चम्बल नदी परियोजनाचम्बल नदीराजस्थान और मध्य प्रदेश
माही नदी/माही बजाज सागर परियोजनामाही नदीराजस्थान और गुजरात
नर्मदा घाटी परियोजनानर्मदा नदीमध्य प्रदेश और गुजरात
भाखड़ा नागल परियोजनासतलज नदीपंजाब, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान
रिहन्द बांध परियोजनारिहन्द नदीउत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश
सरहिंद नहर परियोजनासतलज नदीहरियाणा
टिहरी बांध परियोजनाभागीरथी नदीउत्तराखंड
तुंगभद्रा परियोजनातुंगभद्रा नदीआंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना
पोंग बांध परियोजनाव्यास नदीपंजाब, हरियाणा, राजस्थान
उपरीकृष्णा नदी परियोजनाकृष्णा नदीकर्नाटक
इंदिरा गाँधी नहर परियोजनाव्यास और सतलजपंजाब, राजस्थान
रामगंगा परियोजनारामगंगा नदीउत्तर प्रदेश और उत्तराखंड
इडुक्की परियोजनापेरियार नदीकेरल
उकाई परियोजनाताप्ती नदीगुजरात
जैयतबाड़ी परियोजनागोदावरी नदीमहाराष्ट्र
रिबन बांध परियोजनारावी नदीपंजाब
काकरापार परियोजनाताप्ती नदीगुजरात
कोल बांध परियोजनासतलज नदीहिमाचल प्रदेश
दुलहस्ती परियोजनाचिनाब नदीजम्मू कश्मीर
कोचमपाद परियोजनागोदावरी नदीआंध्र प्रदेश
दुर्गापुर बैराजदामोदर नदीपश्चिम बंगाल और झारखण्ड
मयूराक्षी परियोजनामुरली नदीपश्चिम बंगाल
घाट प्रभा परियोजनाघाट प्रभा नदीकर्नाटक
कांग्सावती परियोजनाकांग्सावती नदीपश्चिम बंगाल
मालप्रभा परियोजनामालप्रभा नदीकर्नाटक
स्वर्णरेखा परियोजनास्वर्णरेखा नदीझारखण्ड और उड़ीसा
लोवर सुवनसीरी जल विद्युत परियोजनासुवनसीरी नदीअरुणाचल प्रदेश
मुक्षकुंड परियोजनामुक्षकुंड नदीआंध्र प्रदेश और उड़ीसा
बाढ़सागर परियोजनासोन नदीउत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार
राजघाट परियोजनाबेतवा नदीउत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश
माताटीला परियोजनाबेतवा नदीउत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश
गंडक परियोजनागंडक नदीबिहार, मध्य प्रदेश, नेपाल
हीराकुंड बांध परियोजनामहानदीउड़ीसा
नागार्जुन सागर परियोजनाकृष्णा नदीआंध्र प्रदेश और तेलंगाना
मेट्टूर बांध परियोजनाकावेरी नदीतमिलनाडु
तुलबुल परियोजनाझेलम नदीजम्मू-कश्मीर
बगलिहार परियोजनाचिनाब नदीजम्मू-कश्मीर
दमन गंगा परियोजनादमन गंगा नदीगुजरात
गिरना परियोजनागिरना नदीमहाराष्ट्र
पम्बा परियोजनापम्बा नदीकेरल
कोयना परियोजनाकोयना नदीमहाराष्ट्र
रानी लक्ष्मी बाई बांधबेतवा नदीउत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश
भीमा परियोजनापवना नदीमहाराष्ट्र
रंजीत सागर बांध परियोजनारावी नदीपंजाब
नाथपा झाकरी परियोजनासतलज नदीहिमाचल प्रदेश
सुइल परियोजनासुइल नदीहिमाचल प्रदेश

दामोदर नदी घाटी परियोजना

  • दामोदर नदी छोटा नागपुर पठार से होते हुए हुगली नदी में मिल जाती है।
  • दामोदर नदी दो राज्यों झारखण्ड और पश्चिम बंगाल में प्रवाहित होती है।
  • आज़ादी के बाद पहली बहुउद्देशीय परियोजना का निर्माण सन 1948 में दामोदर नदी पर किया गया।
  • पश्चिम बंगाल में बाढ़ की समस्या के समाधान के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका की टेनेसी घाटी परियोजना (1933) के आधार पर संयुक्त विकास के लिए 1948 में दामोदर घाटी निगम (DVC) की स्थापना की गयी।
  • मानसून काल में छोटा नागपुर पठार पर वर्षा होती है, परन्तु दामोदर नदी के द्वारा पश्चिम बंगाल में बाढ़ की स्थिति उत्पन्नहो जाती है, यही कारण है कि दामोदर नदी को बंगाल का शोक कहा जाता है।
  • दामोदर घाटी निगम ने इस समस्या को रोकने के लिए आठ बाँध बनाये जिसमें से कोनार, मैथुन, चंदेल और पंचेत हिल बाँध प्रमुख हैं।

भाखड़ा नांगल परियोजना

  • पंजाब में सतलज नदी के पानी को रोक कर दो बाँध बनाए गए – भाखड़ा बांध (हिमाचल प्रदेश) और नांगल बांध (पंजाब), इसे संयुक्त रूप से भाखड़ा नांगल बाँध कहते है।
  • भाखड़ा नांगल बाँध के पीछे जिस जलाशय का निर्माण हुआ है उसे गोविन्द सागर झील (जलाशय) कहते हैं।
  • भाखड़ा बाँध विश्व का सबसे ऊँचा गुरूत्वीय बाँध (226 मीटर) है।
  • भाखड़ा नांगल परियोजना तीन राज्यों – पंजाब,हिमाचल प्रदेश और राजस्थान की संयुक्त परियोजना है।
  • हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और केन्द्र शासित प्रदेश दिल्ली को इस परियोजना का लाभ मिलता है।
  • भाखड़ा नांगल बाँध एशिया का दूसरा सबसे बड़ा बाँध है, जिसकी ऊँचाई 226 मीटर है। इससे ऊँचा एकमात्र टिहरी बाँध (261 मीटर) है।
  • गोविन्द सागर झील (जलाशय) की गिनती मध्य प्रदेश के इंदिरा सागर बाँध के बाद देश के दूसरे सबसे बड़े जल संग्रहण क्षेत्र के रूप में होती है।

रिहन्द बाँध परियोजना

  • रिहन्द बाँध परियोजना उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले तथा मध्य प्रदेश की सीमा पर पिपरी नामक स्थान पर सोननदी की सहायक रिहन्द नदी पर बनाया गया है।
  • सोन नदी अमरकंटक चोटी से निकलकर बिहार में गंगा नदी से मिल जाती है।
  • इस परियोजना के अन्तर्गत 90 मीटर ऊँचा और 930 मीटर लम्बा कंक्रीट बाँध बनाया गया है तथा गोविन्द वल्लभ पन्त सागर नामक कृत्रिम झील का निर्माण भी किया गया है।
  • यह भारत की सबसे बड़ी कृत्रिम झील है। रिहन्द बाँध को ओबरा परियोजना भी कहते हैं।
  • गोविन्द वल्लभ पन्त सागर भारत के मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की सीमा पर स्थित है।
    दिल्लीहावड़ा रेलवे ट्रैक की विद्युत की आपूर्ति इसी परियोजना से होती है।

हीराकुण्ड बाँध

  • हीराकुण्ड बाँध का निर्माण उड़ीसा में महानदी पर किया गया है।
  • हीराकुण्ड बाँध बनने से पहले महानदी को उड़ीसा का शोक कहते थे।
  • हीराकुण्ड बाँध विश्व का सबसे लम्बा बाँध है, इसकी लम्बाई 4801 मीटर है।
  • हीराकुण्ड बांध परियोजना पर हीराकुण्ड बांध, तिकरपाड़ा बांध और नाराज बांध का निर्माण हुआ है।
  • उड़ीसा के ब्रजनगर में पेपर उद्योग का विकास भी इसी परियोजना के कारण हुआ है।

कोसी परियोजना

  • कोसी नदी तिब्बत के पठार से निकलती है और नेपाल से होते हुए बिहार में प्रवाहित होती है।
  • कोसी नदी बिहार के भागलपुर जिले में गंगा नदी से मिलती है।
  • कोसी नदी हिमालय से बहाकर लाए गए अवसादों से मैदानी क्षेत्र में आकर अपने मार्ग को अवरूद्ध कर लेती है और अपना मार्ग बदल लेती है,जिसे विसर्पण कहते हैं।
  • कोसी नदी को बिहार का शोक कहते हैं।
  • बिहार में कोसी नदी से उत्पन्न इस समस्या से समाधान प्राप्त करने के लिए हनुमान नगर नामक स्थान पर एक बाँध बनाया गया है, जिसे हनुमान नगर बैराज कहते हैं।

नर्मदा घाटी परियोजना

  • नर्मदा नदी मैकल पर्वत के अमरकंटक शिखर से निकलकर मध्य प्रदेश और गुजरात राज्य में प्रवाहित होती है।
  • नर्मदा नदी पश्चिम की ओर सोनमुद से बहते हुए एक चट्टान से नीचे गिरते हुए कपिलधारा जलप्रपात का निर्माण करती है। एक संकीर्ण लूप में प्रवाहित होते हुए उत्तर पश्चिम में जबलपुर पहुँचती है शहर के पास नदी भेड़ाघाट के पास धुआंधार नाम के जलप्रपात का निर्माण करती है।
  • मध्य प्रदेश में नर्मदा नदी के विशाल योगदान के कारण इसे ‘मध्य प्रदेश की जीवन रेखा’ भी कहा जाता है।
  • नर्मदा नदी पर दो प्रसिद्ध बांध का निर्माण किया है- सरदार सरोवर बांध (गुजरात), इंद्रा सागर बांध (मध्य प्रदेश)
  • मध्य प्रदेश और गुजरात के साथ साथ महाराष्ट्र और राजस्थान को इस परियोजना का लाभ मिलता है।
  • यह परियोजना बांधों की संख्या के अनुसार भारत की सबसे बड़ी परियोजना है, इस परियोजना पर 30 बड़े, 135 मध्यम, 30 हजार छोटे बांध है।
  • विद्युत उत्पादन की दृष्टि सर्वाधिक लाभ मध्य प्रदेश को मिलता है वही सिंचाई की दृष्टि से गुजरात को लाभ मिलता है।

टिहरी बांध परियोजना

  • टिहरी बांध का निर्माण उत्तराखंड में भागीरथी नदी पर किया गया है।
  • टिहरी बांध परियोजना का निर्माण रूस से सहयोग से हुआ है।
  • टिहरी बांध परियोजना से उत्तर प्रदेश और दिल्ली को लाभ मिलता है।
  • यह परियोजना भूकंप जोन 5 में स्थित है अतः यह बांध सबसे ज्यादा संवेदनशील है।
  • 1901-02 में कावेरी नदी पर शिवसमुद्रम परियोजना का निर्माण किया गया।
  • 1897 में भारत के दार्जिलिंग में पहली जलविद्युत परियोजना प्रारम्भ की गयी है।
  • कलपोंग परियोजना अंडमान निकोबार की पहली जल विद्युत परियोजना है जिसका निर्माण कलपोंग नदी पर हुआ है।
  • राणा सागर बांध, गाँधी सागर बांध, जवाहर सागर बांध का निर्माण चम्बल नदी परियोजना पर राजस्थान में हुआ है।
  • उपरीकृष्णा नदी परियोजना, कृष्णा नदी पर कर्नाटक राज्य में स्थित है। इस परियोजना का उद्घाटन सन 1964 में लाल बहादुर शास्त्री द्वारा किया गया था। आलमपट्टी बांध और शास्त्री बांध इसी परियोजना पर है।
  • इंदिरा गाँधी नहर परियोजना पर पंजाब में व्याससतलज के संगम पर हरिके बैराज का निर्माण किया गया है। यहीं से इंदिरा नहर निकलती है। इसे राजस्थान की लाइफलाइन कहते है। यह परियोजना जर्मनी के सहयोग से विकसित की गयी है।
  • फरक्का बैराज का निर्माण कोलकाता बंदरगाह को जलापूर्ति के लिए गंगा नदी पर किया गया है।

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