होली पर निबंध (Essay on Holi): क्या है होली का महत्व, क्यों मनाते है होली आदि यहां से जानें

होली के दिन सब नए-नए और रंग-बिरंगे रंग में रंग जाते हैं। होली के दिन स्कूलों में कई तरह के कॉन्पिटिशन होते हैं। छात्र होली पर निबंध, होली पर शायरी आदि प्रतियोगिता में भाग लेते हैं। इसलिए हम आपके लिए एख ऐसा आर्टिकल लेकर आए हैं, जो आपको हिंदी में होली पर निबंध, होली के महत्तव के बारे में बताएगा। होली के बारे में निबंध यहाँ से प्राप्त करें।

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होली पर निबंध
होली एक ऐसा त्योहार है, जो पूरे देश में बहुत धूम-धाम से मनाते है। वैसे तो होली हिंदुओं का त्योहार होता है, लेकिन होली को हर धर्म के लोग मनाते हैं। होली को एक ऐसा त्योहार माना जाता है, जिस पर सभी लोग गिले शिकवे मिटाकर  एक दूसरे से गले लगते हैं। होली रंगो का त्योहार होता है।

होली के दिन सब नए-नए और रंग-बिरंगे रंग में रंग जाते हैं। होली के दिन स्कूलों में कई तरह के कॉन्पिटिशन होते हैं। छात्र होली पर निबंध, होली पर शायरी आदि प्रतियोगिता में भाग लेते हैं। इसलिए हम आपके लिए एख ऐसा आर्टिकल लेकर आए हैं, जो आपको हिंदी में होली पर निबंध, होली पर शायरी, होली पर हिंदी में मैसेज आदि के बारे में बताएगा।

होली पर निबंध लिखने से बच्चों को इतिहास के बारे में भी पता चलता है। तो अगर आप भी होली पर हिंदी पर निबंध लिखना चाहते हैं, तो हमारा ये लेख जरूर पढ़ें। आइए होली पर निबंध बच्चों के लिए इस लेख से देखें।

होली पर निबंध (Essay On Holi)

होली पर निबंध के साथ-साथ कई लोग होली क्यों मनाई जाती है, होली मनाने का कारण क्या है, कैसे मनाते हैं होली, होली पर विचार, होली का महत्व, होली के बारे में जानकारी और होलिका कौन थी आदि जानना चाहते हैं। तो आइए आपको बताते हैं कि होली मनाने का कारण क्या है, कैसे मनाते हैं होली, होली पर विचार, होली का महत्व, होली के बारे में जानकारी और होलिका कौन थी, होली पर निबंध।

होली का महत्व बहुत अलग और महत्वपूर्ण है। फाल्गुन मास की पूर्णिमा को होली का त्योहार मनाया जाता है। होली के साथ विभिन्न तरह की कथाएं जुड़ीं हैं। होली खेलने से एक रात पहले होलिका दहन होता है। इसके पीछे भी एक लोकप्रिय पौराणिक कथा है।

हरिण्यकश्यप स्वयं को भगवान मानते थे। वह विष्णु के विरोधी थे जबकि उनके पुत्र प्रह्लाद विष्णु के भक्त थे। हरिण्यकश्यप  ने प्रह्लाद को भगवान विष्णु की भक्ति करने से रोका, लेकिन वह नहीं मानें, तो उन्होंने प्रह्लाद को मारने का प्रयास किया।

हरिण्यकश्यप की बहन होलिका को आग में न जलने का वरदान प्राप्त था। होलिका प्रह्लाद को लेकर चिता में बैठी, लेकिन विष्णु की कृपा से प्रह्लाद को कुछ नहीं हुआ और होलिका जल कर भस्म हो गई।

यह कथा बुराई पर अच्छाई की जीत का संकेत देती है। आज भी पूर्णिमा के दिन होली जलाते हैं और उसके अगले दिन होली खेली जाती है।

होला पर लोग आपस में गले लगते हैं और एक दूसरे को रंग और अबीर लगाते हैं। सभी मिलकर ढोलक बज़ाते हैं। नाचते-गाते हैं। धार्मिक और फागुन गीत गाते है। इस दिन पर लोग खासतौर से गुजिया, पापड़, हलवा, पानी-पूरी तथा दही-बढ़े आदि बनाते हैं। होली मौज-मस्ती व मनोरंजन का त्योहार है। होली त्योहार लोगों में प्रेम और भाईचारे की भावना उत्पन्न करता है।

पूरे भारत में होली का त्योहार अलग-अलग प्रदेशों में अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है। आज भी ब्रज की होली सारे देश में प्रसिद्ध है। बरसाने की लठमार होली भी काफ़ी प्रसिद्ध है। इसमें महिलाओं पर पुरुष रंग डालते हैं और फिर महिलाएँ पुरुषों को लाठियों तथा कपड़े के बनाए गए कोड़ों से मारती हैं। इसी तरह मथुरा और वृंदावन में 14 दिनों तक होली का पर्व चलता हैं। होली के कई दिनों पहले से ये सब शुरू हो जाता है। हरियाणा की धुलंडी में भाभी द्वारा देवर को सताया जाता है। ये वहां की प्रचलित प्रथा है।

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