भारत की प्रमुख नदियाँ : भारत देश में नदियों के बारे में लोगों के मन में एक अलग ही सम्मान भावना होती है यहाँ पर आज भी गंगा नदी को “गंगा माँ” की संज्ञा दी जाती है। ऐसे ही भारत में कई पवित्र नदियाँ प्रवाहित होती है जिनमें गंगा, जमुना, सरस्वती प्रमुख है। भारत की नदियों का देश के आर्थिक एवं सांस्कृतिक विकास में प्राचीनकाल से ही महत्वपूर्ण योगदान रहा है। सिंधु तथा गंगा नदी की घाटियों में ही विश्व की सर्वाधिक प्राचीन सभ्यताओं – सिंधु घाटी तथा आर्य सभ्यता का उदभव हुआ। आज भी देश की सर्वाधिक जनसंख्या एवं कृषि का संकेंद्रण नदी घाटी क्षेत्रों में पाया जाता है। प्राचीन काल में व्यापारिक एवं यातायात की सुविधा के कारण देश के अधिकांश नगर नदियों के किनारे ही विकसित हुए थे तथा आज भी देश के लगभग सभी धार्मिक स्थल किसी न किसी नदी से संबद्ध है।

भारत की प्रमुख नदियाँ (Important Rivers in India in Hindi)

नदियों के देश कहे जाने वाले भारत में चार नदी तंत्र प्रमुख है, उत्तर भारत में सिंधु, मध्य भारत में गंगा, उत्तर पूर्व भारत में ब्रह्मपुत्र, प्रायद्वीपीय भारत में नर्मदा, कावेरी, महानदी जैसी नदियाँ विस्तृत नदी तंत्र का निर्माण करती है। आज कल एसएससी, बैंकिंग, रेलवे जैसी प्रतियोगी परीक्षा में भारत की नदियों, भारत के पर्वत, भारत के पठार से संबधित प्रश्न पूछे जाते है। आज हम आपके लिए भारत की प्रमुख नदियां और उनके उदगम स्थल पर लेख लेकर आये है। आप हमारे इस लेख को पूरा पढ़ सकते है और अपनी सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकते है।

भारत की नदियों को मुख्यता दो भागों में बांटा गया है :

  • हिमालय से निकलने वाली नदियाँ
  • प्रायद्वीपीय भारत से निकलने वाली नदियाँ

हिमालय से निकलने वाली नदियाँ

हिमालय से निकलने वाली नदियों में से तीन नदियाँ सिंधु, सतलज, ब्रह्मपुत्र (मानसरोवर के पास) से निकलती है। सिंधु, सतलज, ब्रह्मपुत्र हिमालय की पूर्ववर्ती नदियाँ है। पूर्ववर्ती का अर्थ यह है कि यह नदियाँ हिमालय के उत्थान से भी पहले मानसरोवर झील के पास से निकलकर टेथीज सागर में गिरती है।
आज जहाँ हिमालय पर्वत है वहाँ पहले टेथीज सागर का विस्तार था जिसे हम टेथीज भूसंहति भी कहते है। जब टेथीज भूसंहति से हिमालय का उत्थान प्रारम्भ हुआ तो नदियों ने न तो अपना आकर बदला और न ही अपना मार्ग बदला। यह नदियाँ हिमालय के उत्थान से साथ साथ हिमालय को कटती रही अर्थात अपनी घाटी को गहरा करती रही जिसके परिणामस्वरूप बृहद हिमालय में गहरी व सकरी घाटियों का निर्माण कर दिया जिसे गार्ज/ कैनियन या I-आकर की घाटी कहते है। उदाहरण के लिए- सिंधु गार्ज (जम्मू कश्मीर में गिलगित के समीप, सिंधु नदी पर), शिपकिला गार्ज (हिमाचल प्रदेश में, सतलज नदी पर), दिहांग गार्ज (अरुणाचल प्रदेश में, ब्रह्मपुत्र नदी पर)
हिमालय की तीन पूर्ववर्ती नदियाँ सिंधु, सतलज, ब्रह्मपुत्र अंतर्राष्ट्रीय है अर्थात इनमें से प्रत्येक तीन तीन देशों से होकर गुजरती है।
सिंधु नदी- चीन, भारत, पाकिस्तान
सतलज नदी- चीन, भारत, पाकिस्तान
ब्रह्मपुत्र नदी- चीन, भारत, बांग्लादेश

सिंधु नदी तंत्र

सिंधु नदी तंत्र की प्रमुख नदी सिंधु है। सिंधु नदी के बायें तट पर पांच प्रमुख नदियाँ आकर मिलती है – झेलम, चिनाब, रावी, व्यास, सतलज।
सिंधु नदी तंत्र की दो नदियाँ सिंधु और सतलज तिब्बत के मानसरोवर झील से निकलती है।
सिंधु नदी तंत्र की तीन नदियाँ चिनाब, रावी, व्यास हिमाचल प्रदेश से निकलती है।
सिंधु नदी तंत्र की एक मात्र नदी झेलम जम्मू कश्मीर से निकलती है।
सिंधु नदी तंत्र की पांच प्रमुख नदियाँ जो पंजाब से होकर बहती है उन्हें पंचनद कहते है। यह पांच प्रमुख सहायक नदियाँ पाकिस्तान के मिथानकोट में सिंधु नदी के बायें तट पर अपना जल गिराती है।
पंचनद के अलावा कुछ और नदियाँ भी सिंधु नदी के बायें तट पर आकर मिलती है- जास्कर, श्यांग, शिगार, गिलगित।
कुछ नदियाँ दायें तट पर आकर मिलती है- श्योक, काबुल, कुर्रम, गोमल।
सिंधु नदी जल समझौता सन 1960 ईस्वीं में हुआ था इसके अनुसार यह तय किया गया कि सिंधु नदी तंत्र की रावी, व्यास, सतलज के जल का 80% भारत व 20% पाकिस्तान उपयोग करेगा। जबकि सिंधु, झेलम, चिनाब के जल का 20% भारत व 80% पाकिस्तान उपयोग करेगा।

सिंधु नदी तंत्र की नदियाों का उदगम

नदीउदगम
सिंधुमानसरोवर के समीप चेमयुंगडुंम ग्लेशियर से
सतलजमानसरोवर से समीप राक्षसताल से
झेलमजम्मू-कश्मीर में बेरीनाग के समीप शेषनाग झील से
चिनाबहिमाचल प्रदेश में बारालाचा दर्रे के समीप से
रावी/ व्यासहिमाचल प्रदेश में रोहतांग दर्रे के समीप से

इनमें से व्यास नदी सतलज नदी की सहायक नदी है।
व्यास नदी सिंधु नदी तंत्र की एकमात्र ऐसी नदी है जो पाकिस्तान में नहीं बहती है। यह नदी रोहतांग दर्रे से निकलकर पंजाब में कपूरथला के निकट हरिके नामक स्थान पर सतलज में मिल जाती है।
सिंधु नदी ब्रह्मपुत्र के बाद भारत में बहने वाली दूसरी सबसे लम्बी नदी है।
भारत की छः सबसे लम्बी नदियाँ इस प्रकार है-

नदीलम्बाई (किमी में.)
ब्रह्मपुत्र2900
सिंधु2880
गंगा2525
सतलज1500
गोदावरी1465
यमुना1385

गंगा नदी तंत्र

भारत का सबसे बड़ा नदी तंत्र गंगा नदी तंत्र है। भारत में सबसे बड़ा जल ग्रहण क्षेत्र गंगा नदी तंत्र का है। गंगा नदी दो देशों भारत व बांग्लादेश से होकर बहती है। गंगा नदी का निर्माण उत्तराखंड में दो धाराओं भागीरथी व अलखनंदा के मिलने से होता है। भागीरथी, उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में गोमुख के निकट गंगोत्री ग्लेशियर से निकलती है। अलखनंदा नदी, सतोपथ (हिमानी) ग्लेशियर से निकलती है।
भागीरथी व अलखनंदा नदी देवप्रयाग में मिलकर गंगा नदी का निर्माण करती है।
पांच प्रयाग निम्नलिखित है-
विष्णुप्रयाग- अलखनंदा+धौलीगंगा
रुद्रप्रयाग- अलखनंदा+मन्दाकिनी
कर्णप्रयाग- अलखनंदा+पिंडर
देवप्रयाग- अलखनंदा+भागीरथी
नंदप्रयाग- अलखनंदा+नंदाकिनी

गंगा नदी भारत के पांच राज्यों उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखण्ड, पश्चिम बंगाल से होकर प्रवाहित होती है। गंगा नदी सबसे ज्यादा उत्तर प्रदेश में बहती है और सबसे कम झारखण्ड में प्रवाहित होती है। गंगा नदी सर्वप्रथम हरिद्वार में पर्वतीय भाग से निकलकर मैदानी भाग में प्रवेश करती है। पश्चिम बंगाल में गंगा नदी दो वितरिकाओं में विभाजित हो जाती है- हुगली व भागीरथी।
भागीरथी नदी बांग्लादेश में प्रवेश कर जाती है और हुगली नदी पश्चिम बंगाल में दक्षिण की ओर बहते हुये बंगाल की खाड़ी में मिल जाती है। कोलकाता, हुगली नदी के तट पर पर बसा है। गंगा की मुख्य धारा अर्थात भागीरथी, बांग्लादेश में पहुंचकर पदमा कहलाती है। आगे चलकर यह बराक या मेघना नदी से मिलती है तो संयुक्त धारा मेघना कहलाती है। मेघना नाम से ही बंगाल की खाड़ी में गिरती है। बांग्लादेश में ब्रह्मपुत्र नदी को जमुना कहते है। अर्थात पदमा व जमुना की संयुक्त धारा पदमा कहलाती है।
विश्व में गंगा नदी व ब्रह्मपुत्र नदी का डेल्टा सबसे बड़ा है। जिसे सुंदरवन का डेल्टा कहते है। इस डेल्टा का विस्तार हुगली नदी से मेघना तक है। सुंदरवन का डेल्टा मैंग्रोव वनों के लिए जाना जाता है। यहाँ पर मुख्य रूप से मैंग्रोवा, सुंदरी, कैसुरिना नामक वन पायें जाते है। भारत में बंगाल टाइगर मैंग्रोव वनों में पायें जाते है। मैंग्रोव बी=वनों का सबसे ज्यादा क्षेत्र पश्चिम बंगाल में है इसके बाद गुजरात तथा आँध्रप्रदेश में है।

गंगा की सहायक नदियाँ

गंगा के दायें तट पर मिलने वाली नदियाँ

गंगा के दाहिने तट पर आकर मिलने वाली नदियाँ मुख्य रूप से प्रायद्वीपीय भारत की नदियाँ है। यमुना गंगा की एकमात्र हिमालयी नदी है जो गंगा के दायें तट पर आकर मिलती है। दायें तट पर मिलने वाली वाली प्रमुख नदियों में यमुना, चम्बल, सिंध, बेतवा, केन, टोंस, सोन है।

यमुना नदी- यह हिमालयी नदी है जो गंगा नदी के दाहिने तट पर मिलती है। यमुना नदी गंगा की सबसे लम्बी सहायक नदी है। यमुना नदी उत्तराखंड में बन्दरपुच्छ चोटी पर यमुनोत्री ग्लेशियर से निकलती है और प्रयाग में गंगा नदी से मिल जाती है। यमुना प्रायद्वीपीय भारत की सबसे लम्बी नदी गोदावरी से छोटी है। यमुना की लम्बाई 1365 किमी है जबकि गोदावरी की लम्बाई 1465 किमी है।

चम्बल/ सिंध/ बेतवा/ केन नदी- यद्यपि चम्बल/ सिंध/ बेतवा/ केन नदियाँ गंगा नदी तंत्र का ही हिस्सा है फिर भी यह नदियाँ अपना जल सीधे गंगा में न गिराकर यमुना में गिराती है। यह चारों नदियाँ प्रायद्वीपीय पठार के अंतर्गत मालवा के पठार से निकलती है।

टोंस/ सोन नदी- केवल यही दोनों नदियाँ प्रायद्वीपीय भारत से निकलकर सीधे गंगा नदी में मिलती है। टोंस नदी प्रयागराज (इलाहाबाद) में गंगा नदी से मिलती है जबकि सोन नदी मैकाल पहाड़ी पर अमरकंटक से निकलकर पटना के समीप गंगा नदी से मिलती है।

गंगा नदी के बायें तट पर मिलने वाली नदियाँ

यमुना को छोड़कर गंगा की शेष हिमालय से निकलने वाली नदियाँ गंगा के बायें तट पर आकर मिलती है। इनका पश्चिम से पूर्व की ओर क्रम इस प्रकार है- रामगंगा, गोमती, घागरा, गंडक, कोशी, महानंदा। इनमे से रामगंगा, गोमती, घाघरा, उत्तर प्रदेश में प्रवाहित होती है। गंडक व कोशी नदियाँ बिहार में प्रवाहित होती है। महानंदा नदी बिहार व पश्चिम बंगाल की सीमा पर प्रवाहित होती है।
गोमती हिमालय की एकमात्र गंगा की सहायक नदी है जो हिमालय से न निकलकर मैदानी क्षेत्र से निकलती है। गोमती नदी का उदगम यूपी के पीलीभीत जिले के तराई के मैदान में फुलहर झील से होता है। लख़नऊ व जौनपुर शहर गोमती नदी के तट पर ही बसे है।
गंडक को नेपाल में सालिग्राम या नारायणी नदी कहते है।
कोशी नदी जोकि नेपाल से निकलकर बिहार में गंगा नदी से मिलती है। इसे बिहार का शोक कहते है।
महानंदा नदी गंगा नदी के तट पर मिलने वाली सबसे पूर्वी या सबसे अंतिम नदी है। महानन्दा नदी का उदगम पश्चिम बंगाल में दार्जिलिंग की पहाड़ियों से होता है।

ब्रह्मपुत्र नदी तंत्र

ब्रह्मपुत्र नदी तीन देशों भारत, चीन, बांग्लादेश से होकर प्रवाहित होती है। ब्रह्मपुत्र नदी को चीन में सांगपो नदी (तिब्बत पर) कहते है वहीं अरुणाचल प्रदेश में दिहांग नदी, असम में ब्रह्मपुत्र नदी व बांग्लादेश में जमुना नदी कहते है।
ब्रह्मपुत्र नदी हिमालय के उत्तर में चीन में तिब्बत के पठार से मानसरोवर झील के पास से निकलती है। यह नदी हिमालय से साथ साथ पूर्व की ओर प्रवाहित होती है। यह नदी अरुणाचल प्रदेश में हिमालय को काटकर गहरे गड्ढे का निर्माण करती है जिसे हम दिहंग गार्ज कहते है।
ब्रह्मपुत्र नदी अरुणाचल प्रदेश में प्रवेश करके अरुणाचल प्रदेश की दो नदियाँ दिबांग व लोहित से मिलती है। इसके बाद ब्रह्मपुत्र नदी असम घाटी में प्रवेश करती है। यह असम में सदिया से लेकर धुमरी तक पूर्व से पश्चिम की ओर रैंप घाटी में प्रवाहित होती है। अचानक से दक्षिण की ओर मुड़कर बांग्लादेश में प्रवेश करती है जहाँ ब्रह्मपुत्र नदी को जमुना नाम से जाना जाता है। रैंप के उत्तर में हिमालय व दक्षिण में शिलांग का पठार है। असम में ब्रह्मपुत्र नदी गुम्फित जलमार्ग बनाती है। इस गुम्फित जलमार्ग में ब्रह्मपुत्र नदी के बीच में कई नदी द्वीप पायें जाते है। इस नदी द्वीपों में मांजुली द्वीप प्रसिद्ध है। मांजुली सबसे बड़ा नदी द्वीप है। असम सरकार ने मांजुली को नदी जिला घोषित किया है जोकि भारत का एकमात्र नदी जिला है। मांजुली द्वीप पर धान की खेती बहुत होती है।
सिक्किम के जेमू ग्लेशियर से निकलने वाली तिस्ता नदी बांग्लादेश में जमुना से मिल जाती है। बांग्लादेश में जमुना पदमा से मिलती है दोनों की संयुक्त धारा पदमा कहलाती है। जब मणिपुर से निकलने वाली बराक या मेघना नदी बांग्लादेश में पदमा से मिलती है तो संयुक्त धारा को मेघना कहा जाता है।
ब्रह्मपुत्र की सहायक नदियाँ कुछ इस प्रकार है- दिबांग, लोहित, घनश्री, सुबानसिरी, जियाभरेली, पागलादिया, मानस, तिस्ता, पितुमारी। मानस नदी भूटान से असम में ब्रह्मपुत्र से मिलती है।

प्रायद्वीपीय भारत से निकलने वाली नदियाँ

प्रायद्वीपीय भारत से निकलने वाली नदियों को दो भागों में बांटा जा सकता है-

  • अरब सागर में गिरने वाली नदियाँ
  • बंगाल की खाड़ी में गिरने वाली नदियाँ

बंगाल की खाड़ी में गिरने वाली नदियाँ

बंगाल की खाड़ी में जल गिराने वाली या पूर्वी तट पर प्रवाहित होने वाली दक्षिण भारत की नदियों का उत्तर से दक्षिण की ओर क्रम इस प्रकार है- दामोदर, स्वर्णरेखा, वैतरणी, ब्राह्मणी, महानदी, गोदावरी, कृष्णा, पेन्नार, कावेरी, वैगई, ताम्रपर्णी।

दामोदर नदी- यह नदी छोटा नागपुर पठार के बीचोबीच भ्रंश घाटी में पूर्व की ओर प्रवाहित होते हुये हुगली नदी में मिल जाती है अर्थात यह नदी अपना जल सीधे बंगाल की खाड़ी में न गिराकर हुगली के माध्यम से अर्थात हुगली नदी के साथ मिलकर बंगाल की खाड़ी में गिरती है।

स्वर्णरेखा नदी- स्वर्णरेखा नदी झारखण्ड की राजधानी राँची के पास से निकलती है जो तीन राज्यों झारखण्ड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल से होकर प्रवाहित होती है और ओडिशा तट पर अपना मुहाना बनाती है। छोटा नागपुर पठार एक औद्योगिक क्षेत्र है यहाँ की औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला अपशिष्ट स्वर्णरेखा नदी में गिरता है जिस कारण स्वर्णरेखा नदी बहुत प्रदूषित हो चुकी है। जमशेदपुर इसी नदी के तट पर है। इसी कारण स्वर्णरेखा नदी में जलीय जीव नहीं पायें जाते है इसीलिए स्वर्णरेखा नदी को जलीय मरुस्थल कहते है।

वैतरणी नदी- यह नदी उड़ीसा के क्योंझर पठार से निकलती है और उड़ीसा के तट पर गिरती है।

ब्राह्मणी नदी- यह नदी भी रांची के समीप से निकलकर उड़ीसा तट पर गिरती है।

नोट:- तीन नदियाँ दामोदर, स्वर्णरेखा, ब्राह्मणी छोटा नागपुर पठार से निकलती है जबकि वैतरणी नदी उड़ीसा के क्योंझर पठार से निकलती है। यह केवल उड़ीसा में प्रवाहित होती है।

महानदी- यह नदी छत्तीसगढ़ के दंडकारण्य पठार से निकलती है और उड़ीसा के कटक में अपना डेल्टा बनाती है। छत्तीसगढ़ में महानदी की घाटी को छत्तीसगढ़ बेसिन कहते है। छत्तीसगढ़ बेसिन धान उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है। इसे धान का कटोरा कहते है।

गोदावरी नदी- गोदावरी नदी दक्षिण भारत की सबसे लम्बी नदी (1465 किमी) है। इसे बूढ़ी गंगा भी कहते है। गोदावरी नदी महाराष्ट्र में पश्चिमी घाट पर स्थित नासिक के त्रियम्बक नामक स्थान से निकलती है और महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना में प्रवाहित होती है। गोदावरी नदी राजमुंद्री के पास अपना डेल्टा बनाती है। गोदावरी की सहायक नदियाँ इस प्रकार है- प्रवरा, पूर्वा, वेनगंगा, पेनगंगा, प्राणहिता, इंद्रावती, मंजीरा। इनमें से मंजीरा को छोड़कर सभी नदियाँ उत्तर की ओर प्रवाहित होती है जबकि मंजीरा दक्षिण की ओर प्रवाहित होकर गोदावरी में मिलती है। वेनगंगा गोदावरी की सबसे लम्बी सहायक नदी है।

कृष्णा नदी- यह दक्षिण भारत की दूसरी सबसे लम्बी नदी है। कृष्णा नदी महाराष्ट में पश्चिम घाट पर्वत पर महाबलेश्वर चोटी से निकलती है और चार राज्यों महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश से होकर प्रवाहित होती है। यह नदी विजयवाड़ा के समीप अपना डेल्टा बनाती है आंध्र प्रदेश तट पर कृष्णा व गोदावरी से डेल्टा के मध्य में कोलेरु झील है। कृष्णा की सहायक नदियों में तुंगभद्रा, धारगंगा, मालप्रभा, दूधगंगा, पंचगंगा, भीमा, मूसी प्रमुख है। इनमें से तुंगभद्रा नदी पश्चिम घाट पर्वत से दो धाराओं तुंग व भद्रा के रूप में निकलती है। यह दक्षिण दिशा से बहकर आती है और कृष्णा में मिल जाती है।

पेन्नार नदी- पेन्नार नदी, कृष्णा व गोदावरी के मध्य में है। यह नदी कर्नाटक के कोलर से निकलकर आंध्र प्रदेश तट पर गिरती है।

कावेरी नदी- कावेरी नदी पश्चिमी घाट पर्वत के ब्रह्मगिरि व पुष्पगिरी पहाड़ी से निकलकर कर्नाटक व तमिलनाडु में प्रवाहित होती है। कावेरी को दक्षिण की गंगा या दक्षिण भारत की गंगा कहते है। कावेरी नदी की घाटी धान उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है इसीलिए इसे दक्षिण भारत के धान का कटोरा कहते है। कावेरी नदी चार राज्यों तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल, आंध्र प्रदेश से होकर प्रवाहित होती है।

वैगई नदी- यह नदी तमिलनाडु के वरूसनाग पहाड़ी से निकलती है। मदुरै, वैगई नदी के तट पर स्थित है। वैगई नदी रामेश्वरम के पास पाक की खाड़ी में अपना मुहाना बनाती है।

ताम्रपर्णी नदी- यह नदी कार्डामम पहाड़ी पर स्थित अगस्तामलाई चोटी से निकलती है और मन्नार की खाड़ी में अपना जल गिराती है।

अरब सागर में गिरने वाली नदियाँ

अरब सागर में गिरने वाली नदियों का उत्तर से दक्षिण की ओर क्रम इस प्रकार है- लूनी, साबरमती, माही, नर्मदा, ताप्ती, मांडवी, जुवारा, शरावती, गंगावेली, पेरियार, भरतपुजा।

नर्मदा नदी- नर्मदा नदी का उदगम मैकाल पर्वत (मध्य प्रदेश) की अमरकंटक की चोटी से होता है। पश्चिम दक्षिण की ओर प्रवाहित होते हुये अरब सागर में गिर जाती है। इसकी लम्बाई 1312 किमी है। इसका सर्वाधिक प्रवाह मध्य प्रदेश में पाया जाता है। यह अरब सागर में गिरने वाली प्रायद्वीपीय भारत की सबसे बड़ी नदी है। इसके उत्तर में विन्द्यांचल पर्वत और दक्षिण में सतपुड़ा पर्वत है। यह प्रायद्वीपीय भारत की कृष्णा व गोदावरी के बाद तीसरी सबसे लम्बी नदी है। मध्य प्रदेश के जबलपुर में कपिल धारा जलप्रपात/दुग्धधारा जलप्रपात/धुआँधार जलप्रपात इस नदी पर है। यह नदी डेल्टा की स्थान पर एस्चुरी (ज्वारनदमुख) बनाती है। इसी नदी पर सरदार सरोवर परियोजना (मध्य प्रदेश व गुजरात) की गयी है।

ताप्ती नदी- ताप्ती नदी का उदगम भी मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में स्थित अमरकंटक चोटी के दक्षिण क्षेत्र से होता है। पश्चिम दक्षिण की ओर प्रवाहित होते हुये अरब सागर में गिर जाती है। इसका प्रवाह तीन राज्यों मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र व गुजरात में है। इसकी लम्बाई 724 किमी है। गुजरात का सूरत ताप्ती नदी के तट पर स्थित है। इसके उत्तर में सतपुड़ा पर्वतमाला और दक्षिण में अजंता पर्वतमाला है। यह नदी भ्रंश घाटी या रिफ्ट वैली में बहते हुये एस्चुरी का निर्माण करती है।

साबरमती नदी- इस नदी का उदगम राजस्थान के उदयपुर जिले के मेवाड़ से अरावली पर्वतीय क्षेत्र से होता है। दक्षिण की ओर प्रवाहित होते हुये (राजस्थान व गुजरात) खम्बात की खाड़ी अर्थात अरब सागर में गिर जाती है। इसी नदी पर अहमदाबाद, गांधीनगर शहर बसा है।

माही नदी- इस नदी का उदगम विन्द्यांचल पर्वतमाला के क्षेत्र मध्य प्रदेश के धार जिले से होता है। उत्तर पश्चिम की ओर प्रवाहित होते हुये कर्क रेखा को कटती है (राजस्थान में) आगे प्रवाह में यह दक्षिण की ओर मुड़ते हुये पुनः कर्क रेखा को काटते हुये खम्बात की खाड़ी में गिर जाती है। इस प्रकार माही नदी कर्क रेखा को दो बार कटती है।

लूनी नदी- इस नदी का उदगम अरावली पर्वतमाला के नागापर्वत के क्षेत्र अजमेर से होता है। दक्षिण पश्चिम की ओर प्रवाहित होते हुये कच्छ की रण के दलदली क्षेत्र में विलुप्त हो जाती है।

घग्घर नदी- इस नदी का उदगम शिवालिक पर्वत के क्षेत्र हिमाचल प्रदेश के शिमला से होता है। दक्षिण पश्चिम की ओर प्रवाहित होते हुये राजस्थान से थार से मरुस्थल से भटनेर के मरुस्थल में विलुप्त हो जाती है।

1 टिप्पणी

Leave a Reply